ईपीएफ (EPF) क्या है? ईपीएफ के फायदे और अन्य जानकारी

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ईपीएफ (EPF) क्या है? अगर आप एक कर्मचारी हो तो ईपीएफ आपके लिये बचत का एक बेहतर विकल्प है। यह आपके भविष्य के लिये फायदे का सौदा है। अगर आप ईपीएफ के बारे में नही जानते हैं तो ये आर्टिकल आपके लिये ही है।

ईपीएफ क्या है? What is EPF in Hindi

ईपीएफ (EPF) की फुल फॉर्म एम्पलायीज प्रोविडेंट फंड (Employees’ Provident Fund) या हिंदी में कर्मचारी भविष्य निधि होता है। ये स्कीम निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिये फायदेमंद है। किसी अन्य स्कीम में निवेश करने के से ज्यादा ब्याज इस स्कीम में मिलता है और सरकार द्वारा इनकम टैक्स में भी छूट दी जाती है।

इस योजना में भागीदारी करने के बाद आपकी सैलरी से प्रीमीयम काटा जाता है और आपका नियोक्ता (आप जिस भी संस्थान में कार्य कर रहे हैं वह) भी इस स्कीम में आपके लिये योगदान करता है। इसके बाद जब आप रिटायर्ड होते हैं तो आपको ब्याज सहित एक अच्छी खासी रकम मिल जाती है। (ये भी जरूर पढ़े:— सिबिल स्कोर क्या होता है, अपना सिबिल स्कोर कैसे सुधारें)

यह योजना कर्मचारी भ​विष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) द्वारा प्रबंधित योजना हैं। इस योजना में जितना निवेश कर्मचारी करता है उसका नियोक्ता भी उसमें उतना ही निवेश करता है। यह निवेश सैलरी के आधार पर होता है। ईपीएफ में कर्मचारी की सैलरी का 12 प्रतिशत हिस्सा जमा होता है। वहीं नियोक्ता 8.33 फीसदी (1250 से कम) ईपीएफ में जमा करता है और शेष 3.67 फीसदी ईपीएस (EPS) में जमा करता है।

ईपीएफ और ईपीएस में अंतर Different Between EPF and EPS

ईपीएफ और ईपीएस में बहुत अंतर हैं। ईपीएफ का पैसा आप नौकरी के बाद निकाल सकते हैं। आपको एक मुश्त राशि ब्याज सहित मिल जाऐगी। वहीं ईपीएस एक पेंशन सिस्टम होता है जिसे आप सिर्फ 58 साल की उम्र के बाद ही निकाल सकते हो। ये मासिक पेंशन के रूप में आपको मिलेगी।

क्या ईपीएफ (EPF) में योगदान अनिवार्य है?

वैसे तो ईपीएफ में सभी कर्मचारियों के लिये योगदान अनिवार्य है। लेकिन इसमें एक कानूनी पेज है। अगर किसी प्रतिष्ठान/कंपनी में 20 से कम कर्मचारी हैं तो ईपीएफ कटौती आवश्यक नही हैं। वहीं अगर किसी प्रतिष्ठान/कंपनी में 20 से ज्यादा कर्मचारी हैं और सभी कर्मचारियों की सैलरी 15 हजार रूपये अधिक है और सबने फार्म 11 भरकर ईपीएफ से बाहर रहने का निर्णय लिया है तो ईपीएफ में कटौती नही होगी।

वहीं अगर कोई नियोक्ता ईपीएफ की सुविधा देता है लेकिन किसी कर्मचारी का वेतन 15 हजार रूपये मासिक से ज्यादा है तो वह फॉर्म 11 भरकर खुद का ईपीएफ से अलग रख सकता है। लेकिन यह विकल्प कर्मचारी को नौकरी की शुरूआत में ही चुनना पड़ता है। अगर कर्मचारी ने जीवन में 1 बार भी ईपीएफ में योगदान किया है तो फिर वह उससे बाहर नही रह सकता है। अगर कोई कर्मचारी ईपीएफ में अधिक योगदान करना चाहता है तो उसे वीपीएफ अपनाना होगा।

ईपीएफ के फायदे

ईपीएफ में निवेश में अन्य किसी निवेश से ज्यादा ब्याज मिलता है। कर्मचारी के रिटायरमेंट या नौकरी बदलने के 2 महीने के बाद ब्याज सहित एक मुश्त राशि कर्मचारी को मिल जाती है। वहीं ईपीएफ में योगदान करने पर इनकम टैक्स में छूट मिलती है।

ईपीएफ में कर्मचारी को नौकरी बदलने पर ईपीएफ अमाउंट को नये ईपीएफ अकांउट में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके लिये कर्मचारी को पुराने नियोक्ता के पास जाने की जरूरत नही हैं। इसके लिये कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की वेबसाइट पर जाकर आधार नंबर से एक यूनीवर्सल अकांउट नंबर (यूएएन) बना सकते हैं। ये यूनीवर्सल अकाउंट नंबर आपको पोर्टबिलिटी की सेवा देता है

ईपीएफ से बैलेंस कब निकाल सकते हैं?

ईपीएफ बैलेंस को रिटायरमेंट के बाद या फिर नौकरी छोड़ने के 2 महीने बाद (यदि आप बेरोजगार हैं तो) निकाला जा सकता है। लेकिन इसके अतिरिक्त कुछ जरूरतों जैसे प्लॉट, मकान खरीदने या हाउस लोन जमा करने, या किसी बेटे, बेटी, भाई, बहन की शादी के लिये फार्म 31 जमा करके निकाला जा सकता है।

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