केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय| Biography

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केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय – हिंदी के प्रमुख कवि केदारनाथ अग्रवाल का जन्म 1 अप्रेल 1911 में उत्तर प्रदेष के बांदा जिले के कमासिन गांव में हुआ था। उनके पिता काा नाम हनुमान प्रसाद गुप्ता था जोकि एक प्रसिध्द कवि थे। उनकी माताजी का नाम घसीटो देवी था। केदारनाथ जी का बचपन अपने गांव मे ही बीता और वहीं उनकी षिक्षा-दीक्षा हुई। प्रारंम्भिक षिक्षा के बाद केदारनाथ जी पढ़ाई के लिये रायबरेली, कटनी, जबलपुर, इलाहाबाद भी गये। जब वह जबलपुर में कक्षा सातवीं में थे तब इनकी षादी इलाहाबाद की पार्वती से हो गया था। उन्होने इलाहाबाद से बी.ए. की डिग्री हासिल की उसके पष्चात लाॅ की पढ़ाई के लिये कानुपर चले गये। वकालत करने के बाद बांदा में वह अपने चाचा मुकुंदलाल अग्रवाल के साथ प्रैक्टिस करने लगे। सन 1963 से सन 1970 तक वह सरकारी वकील भी रहे। ये भी पढ़ेंः- मदर टेरेसा का जीवन परिचय

केदारनाथ जी इलाहाबाद विष्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान ही कविताऐं लिखने लगे। इलाहाबाद से ही उनका साहित्यिक सफर षुरू हो गया था। केदारनाथ जी का पहला कविता संग्रह ‘फूल नही रंग बोलते हैं‘ से सहित सभी प्रमुख कृतियां इलाहाबाद के ही परिमल प्रकाषन द्वारा प्रकाषित हुई। परिमल प्रकाषन के मालिक षिवकुमार उन्हे पिता समान मानते थे और बाबूजी कहते थे। और उनके प्रत्येक जयंती पर गोश्ठी एवं सम्मान समारोह आयोजित कराते थे।

जिस वक्त आजादी का आंदोलन अपने चरम पर था तब केदारनाथ जी की लेखनी भी अपने चरम पर थी। देष की जनता में अंग्रेजी हकूमत के खिलाफ आक्रोष था। उस समय केदारनाथ जी अपनी लेखनी चलाने लगी। लगभग उसी समय देष में प्रगतिषील चेतना का उदय हुआ था। प्रतिवादी आंदोलन की वजह से 1936 में लखनऊ में प्रेमचंद्र की अध्यक्षता में प्रगतिषील लेखक संघ का अधिवेषन हुआ। केदारनाथ जी का पहला काव्य संग्रह ‘युग की गंगा‘ मार्च 1947 में प्रकाषित हुआ। केदारनाथ अग्रवाल की कविताओं का अनुवाद रूसी, जर्मन, चेक और अंग्रेजी में हुआ है। केदारनाथ जी को उनके कविता संग्रह ‘फूल नही, रंग बोलते हैं के लिये सोवियतलैंड नेहरू पुरूस्कार से सम्मानित किया गया। वहीं कविता संग्रह ‘अपूर्वा‘ के लिये 1986 में साहित्य अकादमी पुरूस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके अलावा उन्हे हिंदी संस्थान पुरूस्कार, तुलसी पुरूस्कार, मैथिलीषरण गुप्त पुरूस्कार आदि से भी सम्मानित किया गया। 22 जून 2000 को इनकी 90 वर्श की आयु में इनकी मृत्यु हो गई।

केदारनाथ जी की रचनाऐं

गुलमेंहदी, हे मेरी तुम, जमुन जल तुम, जो शिलाएँ तोड़ते हैं, कहें केदार खरी खरी, खुली आँखें खुले डैने, कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह, मार प्यार की थापें, फूल नहीं, रंग बोलते हैं-1, फूल नहीं रंग बोलते हैं-2, आग का आइना, पंख और पतवार (1979), अपूर्वा, नींद के बादल, आत्म गंध, बम्बई का रक्त स्नान, युग-गंगा, बोले बोल अबोल, लोक आलोक, चुनी हुयी कविताएँ, पुष्पदीप, वसंत में प्रसन्न पृथ्वी, अनहारी हरियाली

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