कन्हैया कुमार की जीवनी

84

बिहार के बेगुसराय से आकर भारतीय छात्र राजनीति का सबसे सशक्त चेहरा बनने वाले कन्हैया कुमार (Kanhiya Kumar) की कहानी काफी दिलचस्प है। छात्र राजनीति से सुर्खियों में आये कन्हैया कुमार मुख्यधारा की राजनीति के भी दावेदार माने जा रहे हैं। भविष्य में यदि कन्हैया कुमार यदि एक सांसद के रूप में पहचाने जाऐ तो इसमें भी कोई आश्यचर्य नही होगा।

कन्हैया कुमार का प्रारम्भिक जीवन

कन्हैया कुमार का जन्म बिहार के बेगुसराय जिले के बिहट नाम के एक गाॅव में हुआ। कन्हैया कुमार बेहद साधारण परिवार से हैं। उनके पिता काफी समय से बीमार हैं वे चल फिर नही सकते हैं। उन्हे पैरालाइसिस हुआ है। कन्हैया कुमार की माता एक आंगनवाढी कार्यकर्ता हैं। कन्हैया का बडा भाई एक प्राइवेट कम्पनी में जाॅब करता है। कन्हैया कुमार का पैतृक गाॅव तेतरा विधान सभा के निर्वाचन क्षेत्र में हैं और वहाॅ कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ इण्डिया (CPI) का बोलबाला है। यही कारण हैं कि कन्हैया कुमार की विचार धारा भी कम्युनिस्ट पार्टी से मिली जुली है।

कन्हैया कुमार बचपन से ही प्रतिभा के धनी रहे हैं। बचपन से ही कन्हैया खुले विचारों वाले रहे हैं उन्हे अभिनय मे रूचि थी और वे कई सोशल एक्टिविटीज व नाटकों मे भाग लेते रहे हैं।

कन्हैया की स्कूलिंग RKC High School बरौनी में हुई। इसके बाद 2002 वे गेजुएशन करनें पटना के काॅलेज आॅफ काॅमर्स (College of Commerce) में आगये। यहीं से कन्हैया का रूझान छात्र राजनीति की तरफ हुआ और वे कम्पयुनिस्ट पार्टी के छात्र संगठन आॅल इण्डिया स्टूडेन्ट फेडरेसन (AISF) से जुड गये।

ग्रेजुऐशन पूरा करनें के बाद कन्हैया कुमार ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में एडमिशन ले लिया। वे अफ्रीकन स्टडीज पर पीएचडी कर रहे हैं।

जब कन्हैया कुमार जेएनयू के छासंसंघ के प्रेसीडेन्ट बने

सन 2015 में कन्हैया कुमार एक इतिहास रचते हुये जेएनयूएसयू  (JNUSU) के अध्यक्ष चुने गये। ये पहला मौका था जब एआईएसएफ  का कोई उम्मीदवार जेएनयूएस का प्रेसीडेन्ट बना। इस चुनाव में कन्हैया कुमार ने आईसा, एबीवीपी, एसएफआई और एनएसयूआई के उम्मीदवारों को हराया। कहा जाता है कि कन्हैया कुमार के जीत में उनका चुनाव से एक दिन पहले दिया गया भाषण काफी जिम्मेदार था।

विवादों में कन्हैया कुमार

कन्हैया कुमार का और विवादों का चोली दामन का साथ रहा है। कन्हैया के प्रेसीडेन्ट चुने जाने के बाद 12 फरवरी 2016 में ससंद पर हमले के आरोपी अफजल गुरू की वरशी पर जेएनयू के परिसर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में देश विरोधी नारे लगे। जिसके लिये कन्हैया कुमार को जिम्मेदार माना गया और उन्हे गिरफ्तार कर लिया गया। 13 फरवरी को जेएनयू परिसर से गिरफ्तार किये गये कन्हैया कुमार पर पुलिस ने आईपीसी धाराओं अंन्तगर्त धारा 124-ए(राजद्रोह) और धारा 120-बी (आपराधिक साजिस) का चार्ज लगाया। लेकिन पुलिस द्वारा कोई भी ठोस सबूत न दे पाने के कारण 2 मार्च 2016 को उन्हे अन्तरिम जमानत पर छोड दिया गया।

कन्हैया कुमार का कहना है कि वे किसी भी देशविरोधी घटना में शामिल नही थे। वहीं कन्हैया कुमार के मा-बाप के अनुसार कन्हैया कुमार राजनीति का शिकार हुये है।

कन्हैया कुमार बन गये छात्र राजनीति का सबसे सशक्त चेहरा

12 सितम्बर की घटना के बाद कन्हैया कुमार नेशनल मीडिया के लिये एक सनसनी खबर बन गये। मीडिया ने कन्हैया कुमार को पूरे देश के सामने लाकर रख दिया। उसके बाद कन्हैया कुमार छात्र राजनीति में चमकते सितारे बन कर उभरे। उनके खुले विचार वाले भाषणों से उनके फैन फोलोइंग जेएनयू से बाहर निकल कर पूरे भारत वर्ष में फैल गयी।

कन्हैया कुमार के भाषणों को यूटयूब पर लाखों बार देखा गया है। आज उनके लाखों फाॅलोवर्स हैं। जो कन्हैया कुमार को अपना आदर्श मानते हैं। कन्हैया कुमार पहले ऐसे छात्र नेता थे जो छात्रों के अलावा देश के किसान, गरीब मजदूर, आम जनता के हित के बारे में खुलकर बोलते हैं। यही कारण हैं कि कन्हैया कुमार को मुख्यधारा की राजनीति में एक सशक्त उम्मीदवार माना जा रहा है और वो दिन दूर नही जब कन्हैया कुमार एक सांसद के रूप में पहचाने जाऐं। कन्हैया कुमार ने 2019 लोकसभा चुनाव में बिहार की बेगुसराय सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़ा लेकिन भाजपा के प्रत्याशी गिरिराज सिंह ने उन्हें 4 लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया।

बिहार से तिहाड तक

कन्हैया कुमार ने अपने इस उतार चढाब वाले जीवन को लेकर एक किताब भी लिखी जो कि काफी लोकप्रिया हुई। इस किताब का नाम बिहार टू तिहाड है। इस किताब में कन्हैया कुमार ने अपने प्रारम्भिक जीवन से लेकर तिहाड जाने तक के सभी अनुभव लिखे हैं।

ये लेख इण्टरनेट पर उपलब्ध सामग्री का अध्ययन करके लिखा गया है। यदि आपके पास इस लेख से सम्बन्धित कोई जानकारी है तो आप हमारे साथ साझा कर सकते हैं।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here