मैरिज सर्टिफि​केट कैसे बनबाऐं। भारतीय कानून की जानकारी

मैरिज सर्टिफि​केट कैसे बनबाऐं अगर आप शादी—शुदा हैं तो आपको मैरिज सार्टिफिकेट यानी विवाह ​प्रमाण पत्र के बारे में जान लेना बहुत जरूरी है। यह एक वैध कानूनी दस्तावेज होता है जो कि आपके वैवाहिक जीवन में काम आता है। अगर आप मैरिज स​र्टिफिकेट के बारे में नही जानते हैं या फिर ये जानना चाहते हैं कि मैरिज सर्टिफि​केट कैसे बनबाऐं तो ये पोस्ट आपके लिये हैं।

मैरिज सर्टिफिकेट क्या होता है?

मैरिज सार्टिफिकेट यानी विवाह प्रमाण पत्र एक ऐसा कानूनी दस्तावेज होता है जो कि यह यह साबित करता है कि महिला पुरूष आपस में शादी शुदा हैं। इस दस्तावेज पर पति—पत्नी दोनों के पहचान का विवरण होता है। मैरिज सार्टिफिकेट बनबना बहुत जरूरी है। वर्ष 2006 में सुप्रीम कोर्ट ने शादी को पंजीकृत कराना अनिवार्य कर दिया है। यह दस्तावेज महिलाओं के लिये एक आवश्यक दस्तावेज है। यह सार्टिफिकेट महिला के अधिकारों का सुरक्षा प्रदान करता है। (ये भी जरूर पढ़ें:— ईपीएफ (EPF) क्या है? ईपीएफ के फायदे और अन्य जानकारी)

भारत में विवाह का पंजीकरण तीन कानूनों के तहत किया जाता है जो कि निम्न लिखित हैं

  • हिंदू विवाह अधिनियम 1955 — यह अधिनियम हिंदुओ के साथ—साथ बौध्द, ब्रह्म और आर्य समाज के लोगों को पर लागू होता है।
  • विशेष विवाह अधिनियम 1954 — ये अधिनियम देश के सभी धर्म, जाति के नागरिकों पर लागू होता है।
  • पारसी विवाह और तलाक अधिनियम 1936 — यह अधिनियम केवल पारसी लोगों पर लागू होता है।

मैरिज सार्टिफिकेट के लिये वर या पुरूष की आयु 21 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहये वहीं वधु या महिला की आयु 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिये।

मैरिज सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं

मैरिज सार्टिफिकेट (विवाह प्रमाण पत्र) आनलाइन व आफलाइन दोनो प्रक्रियाओं से बनबाया जा सकता है। यहां आप दोनो तरीकों के बारे में जानोगे।

ऑनलाइन मैरिज सर्टिफि​केट कैसे बनबाऐं

  • आनलाइन मैरिज सार्टिफिकेट बनबाने के लिये अपने राज्य की सरकारी वेबसाइट पर जाऐं। अगर आपको वेबसाइट के बारे में नही पता तो आप गूगल में मैरिज सार्टिफिकेट आनलाइन आवेदन (अपने राज्य का नाम) के साथ सर्च कर सकते हो।
  • इस वेबसाइट पर विवाह पंजीकरण नाम का एक विकल्प होगा उस पर क्लिक करने के बाद आधार कार्ड या वोटर कार्ड के माध्यम से रजिस्ट्रेशन करना होगा।
  • रजिस्ट्रेशन के बाद आपके सामने एक विस्तृत फॉर्म खुल कर आयेगा। जिसमें मांगी गई जानकारियों को सही एवं पूर्ण तरीके से भरें।
  • फार्म भरने के बाद आपको अपाइंटमेंट की तारीख का चयन करना होगा। आप अपने हिसाब से तारीख का चयन कर सकते हैं।
  • अब आवदेन सवमिट कर दें। आवेदन स​बमिट करने के पास आपको एक रसीद डाउनलोड करनी होगी। इस रसीद का प्रिंट आउट निकाल कर अपने पास रख लें।
  • आपके द्वारा तय की गई अपांइमेंट की तारीख वाले दिन अपनी पत्नी और सभी सबूत जैसे शादी के कार्ड, तस्वीरें और गवाह को साथ लेकर विवाह पंजीकरण कायार्ल में साक्षात्कार के लिये जाऐं।
  • साक्षात्कार के बाद आपका मैरिज सार्टिफिकेट अप्रूव कर दिया जाऐगा जिसका प्रिंट आप आनलाइन निकाल सकते हो।

आफलाइन मैरिज सर्टिफि​केट कैसे बनबाऐं

मैरिज सार्टिफिकेट के आफलाइन आवेदन के लिये आपको एसडीएम कार्यालय में जाकर मैरिज सर्टिफिकेट फार्म भरकर जमा करना होगा। जमा करते समय आपको सभी सबूत और गवाह साथ ले जाने होंगे। जैसे ही आपका आवेदन पंजीकृत हो जाऐगा कार्यालय द्वारा आपको सार्टिफिकेट प्रदान कर दिया जाऐगा।

मैरिज सर्टिफिकेट हेतु आवश्यक दस्तावेज

विवाह प्रमाण पत्र यानी मैरिज सार्टिफिकेट बनबाने के लिये आधार कार्ड जरूरी है। अगर पति पत्नी में से किसी का भी आधार कार्ड नहीं है तो पहले आधार कार्ड बनबा लें। आधार कार्ड के अलावा आपको निम्न दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी।

  • पहचान प्रमाण पत्र— पहचान प्रमाण पत्र में आपको कोई एक ऐसा वैध सरकारी प्रमाण पत्र चाहिये जिसमें आपका नाम पता व फोटो है। पहचान प्रमाण पत्र के रूप में आप आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता कार्ड, पासपोर्ट या ड्राइविंग लाइसेंस का इस्तेमाल कर सकते हो।
  • जन्म प्रमाण पत्र— क्या विवाह के लिये कानूनी रूप से आपकी आयु पूर्ण हैं इसके निर्धारण करनें के लिये आपको जन्म को कोई वैध प्रमाण पत्र जैसे जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, या स्कूल द्वारा जारी टी.सी. प्रस्तुत करनी होगी।
  • शादी के बाद तथा पहले का पता— वर वधु का एक शादी से पहले व शादी के बाद का पता प्रमाण पत्र भी प्रस्तुत करना होगा। ​इसमें आप आधार कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस आदि का इस्तेमाल कर सकते हो।
  • गवाह— वर व वधु दोनो पक्ष से गवाह प्रस्तुत करने होगें साथ ही गवाह के पहचान प्रमाण पत्र व पता प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने होंगे।

भारत में विवाह पंजीकरण की आवश्यकता

  • भारत में ज्यादातर महिला शादी के बाद अपना सरनेम बदल लेती हैं, वे अपने मूल सरनेम की जगह पति के सरनेम का इस्तेमाल करती हैं। वहीं शादी से पहले के उनके सभी दस्तावेज जैसे कॉलेज के दस्तावेज में उनका सरनेम अलग हो जाता है जिससे कई बार कानूनी रूप से दिक्कत आती हैं। मैरिज सर्टिफिकेट ऐसी ही दिक्कतों में आपकी समस्या का समाधान करता है।
  • शादी एक सामाजिक बंधन हैं लेकिन कई बार जीवनसाथी शादी करने के बाद मुकर जाते हैं। ज्यादातर पुरूष ऐसा करते हैं जब वे किसी महिला से अपनी शारीरिक जरूरतों को पूरा करने के लिये महिलाओं के साथ शादी कर लेते हैं और बाद में मुकर जाते हैं। ऐसे में उन्हें कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है और बहु के रूप में अपने अधिकारों से वंचित रहना पड़ सकता है। मैरिज सर्टिफिकेट की मदद से वे अपना कानूनी रूप से अधिकार का दावा कर सकती हैं और न्याय प्राप्त कर सकती हैं।
  • मैरिज सर्टिफिकेट ऐसी शादियों को सुरक्षा प्रदान करता है जो कि घरवालों की मर्जी के बगैर, या किसी अन्य धर्म जाति के महिला/पुरूष से की जाती हैं। ऐसी शादियों को आज भी हमारा समाज स्वीकार नही करता है। मैरिज सार्टिफिकेट ऐसी शादियों में बहुत जरूरी होता है वह दंपति को सुरक्षा प्रदान करता है।
  • पति की मृत्यु के बाद उसकी संपत्ति में दावा करने के लिये मैरिज सार्टिफिकेट की आवश्यकता होती है।
  • शादी के बाद पासपोर्ट बनबानें के लिये मैरिज सर्टिफिकेट अनिवार्य है।

इनके अलावा भी मैरिज सर्टिफिकेट के अनगिनत लाभ व आवश्यकताऐं हैं। अगर आप शादी—शुदा हैं तो मैरिज सार्टिफिकेट जरूर बनबाऐं।

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