Artificial Intelligence क्या है? AI कैसे काम करता है?

Artificial Intelligence क्या है?

जैसे जैसे हम Technology के युग में बढ़ते जा रहे हैं वैसे वैसे हमें Technology के नए स्वरूप देखने को मिलते हैं। हाल ही में एक नई तकनीकि क्रत्रिम बुध्दिमत्ता यानी Artificial Intelligence के बारे हम सब सुन रहे हैं। आखिर ये Artificial Intelligence क्या है? और ये कैसे काम करता है? यह तकनीकि हमारे किस काम की है। इस तकनीकि के क्या फायदे हैं और क्या नुकसान हैं। सब जानते हैं आज इस पोस्ट में ।

हाल ही में भारत सरकार ने क्रत्रिम बुध्दिमत्ता मिशन पर नीति आयोग एवं इलेक्ट्राॅनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Electronics and Information Technology- MeitY) के सहयोग से एक समिति का गठन किया है। जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव, नीति आयेग के सीईओ और MeitY के सविच शामिल हैं। एवं इस समिति की अध्यक्षता मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार के. विजय राघवन कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य डिजीटल अर्थव्यवस्था बनाने के साथ-साथ सरकारी काम काज को एआई से जोड़ना हैं।

नीति आयोग ने National Artificial Intelligence के लिये वित्त समिति (EFC) से 7000 करोड़ रूपये के बजट को खर्च करने की अनुमति ली है। जबकि MeitY ने इसके लिये 4000 करोड़ रूपये का अलग से प्रस्तवा भेजा है।

Artificial Intelligence क्या है? Everything About AI in Hindi

तकनीकि ने हमारी जिंदगी बहुत आसान की है। जो काम कुछ साल पहले लगभग असंभव थे आज वही काम तकनीकि की वजह से संभव हैं। पिछले कुछ सालों में तकनीकि का एक बहुत एडवांस रूप AI Concept दुनिया के सामने आया है। हमारी दुनिया के लिये यह तकनीकि दुनिया के लिये बिल्कुल अजूबे की तरह है। AI (Artificial Intelligence) यानी ऐसा क्रत्रिम दिमाग जो कि इंसानों की तरह सोच सके, फैसला ले सके। ये भी जरूर पढ़ेंः- साइंटिस्ट कैसे बनें? पूरी जानकारी हिंदी में

Artificial Intelligence क्या है? AI का फुल फाॅर्म Artificial Intelligence है। इसका हिन्दी नाम क्रत्रिम बुध्दिमत्ता है। यानी एक क्रत्रिम दिमाग। इस तकनीकि के माध्यम से मशीनों के अंदर एक क्रत्रिम दिमाग डाला जाता है। जैसे मशीनें इतनी उन्नत हो सकें जिससे वह इंसानों की तरह सोच सकें और काम कर सकें।

अगर आपने Marvel Studios की Iron Man सीरीज देखी है या Avengers सीरीज देखी है तो आपने टोनी स्टार्क के कंप्यूटर JARVIS के बारे में जरूर पता होगा। यह कंप्यूटर एक Advance AI है जो टोनी स्टाॅर्क से एक दोस्त की तरह बात करता है। एक एंम्पलाई की तरह उसके सारे काम करता है। जो एक नर्स की तरह उसकी देखभाल करता है। हांलांकि ये फिल्म में सिर्फ एक कल्पना थी। लेकिन असल में विज्ञान उसी तकनीक पर काम कर रहा है और कुछ हद तक सफल भी हो चुका है।

आसान भाषा में कहें कि Artificial Intelligence विज्ञान की एक ऐसी शाखा है जो मशीनों में सोचनें समझने और निर्णय लेने की क्षमता का विकास करती है। यह Computer Science की सबसे उन्नत तकनीकि है। Artificial Intelligence तकनीकि की मदद से इस प्रकार का दिमाग बनाया जाता है जो कि इंसानों की तरह सोच सके। यानी ऐसा कंप्यूटर जो इंसानों की तरह सोचने की क्षमता रखता है। जैसे आवाज को पहचानना, समस्या को सुलझाना, नई चीजें सीखें, प्लानिंग करना आदि।

आर्टिफिशिलय इंटेलीजेंस की के द्वारा एक ऐसा कंप्यूटर कंट्रोल्ड रोबोट या साॅफ्टवेयर बनाने की योजना हैं जिससे रोबोट या कंप्यूटर मनुष्य के दिमाग की तरह सोच सके। अपने इनवायरमेंट के साथ इंटरैक्ट करके प्राप्त डाटा पर खुद बुध्दमानी से कार्य कर सके।

Artificial Intelligence के प्रकार

Artificial Intelligence की शुरूआत 1950 में हुई थी। जिसके जनक जाॅन मैकार्थी हैं। Artificial Intelligence को निम्न प्रकारों में बांटा गया है।

  • पूर्णतः प्रतिक्रियात्मक (Purely Reactive)
  • सीमित स्मृति (Limited Memory)
  • मस्तिष्क सिध्दांत (Brain Theory)
  • आत्म चेतन (Self Conscious)

कैसे हुई Artificial Intelligence की शुरूआत

क्रत्रिम बुध्दिमत्ता यानी Artificial Intelligence पर शोध तो 1950 में ही शुरू हो गया था। लेकिन इसे पहचान 1970 में मिली। जापान ने सबसे पहले 1981 में 5th Generation नाम के एक प्रोजेक्ट की शुरूआत की थी। इसमें सुपर कंप्यूटर के विकास के लिये 10 साल के कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की। इसके बाद अन्य देश भी इस ओर आकर्षित हुऐ। फिर ब्रिटेन ने एल्वी नाम का एक प्रोजेक्ट बनाया। फिर अन्य एस्प्रिट नाम से एक प्रोजक्ट की शुरूआत की। 1983 में निजी कंपनियों ने माइक्रो-इलेक्ट्राॅनिक्स टेक्नाॅलाॅजी की स्थापना की।

AI (Artificial Intelligence) के उदाहरण

आज AI एक बहुत लोकप्रिय तकनीकि है। हांलांकि ये तकनीकि अभी अपने शुरूआती दौर में हैं और इसे विकसित होने में अभी कई साल लगेंगे। लेकिन वर्तमान में AI का इस्तेमाल करना शुरू कर चुके हैं। जी हां हम सब लोग AI का कहीं न कहीं इस्तेमाल कर रहे हैं तो आइये जानते हैं Artificial Intelligence के कुछ खास उदाहरण

SIRI एवं Google Assistant

अगर आप ने iPhone चलाया है तो आप SIRI के बारे में जरूर जानते होगे। वहीं अगर Android यूजर हैं तो अपने Google Assistant का इस्तेमाल किया ही होगा। यह दोनो आभासी सहायक (Virtual Assistant) हैं और एक प्रकार के AI हैं। जो कि आपके निर्देशों के हिसाब से काम करते हैं। ये आपके लिये मैसेज भेज सकते हैं, काॅल कर सकते हैं। आपको चुटकुले सुना सकते हैं। ये आपकी बातों का मजेदार जबाब भी देते हैं। एलैक्सा भी इसी प्रकार का वचुअल असिस्टेंट हैं।

Tesla

Artificial Intelligence अब Automobiles सेक्टर की तरफ भी अपने कदम बढ़ा चुका है। कार बनाने वाली कंपनी टेस्ला ने एक Self Driving कार बनाई है। जिसमें एआई तकनीकी का इस्तेमाल किया गया। सोचिये बिना ड्राइवर के कोई कार सड़क पर दौड़ेगी और अपने खुद के दिमाग से मुड़ेगी, हाॅर्न बजाएगी, ब्रेक लगाएगी। तो है न एआई कमाल का।

AI कैसे काम करता है?

एआई एक खास किस्म की प्रोग्रामिंग है। जिससे मशीन मनुष्य के व्यवहार को समझती है। विभिन्न परिस्थितियों में मनुष्यों के दिये गये निर्देशों को अपनी मेमाॅरी में स्टोर करती है और फिर से वही परिस्थिति होने पर स्वयं निर्णय लेती है। इस प्रकार मशीन खुद से ही सीखती है। मशीन में कई निर्देश पूर्व में स्टोर कर दिये जाते हैं। सही समय आने पर वह उन निर्देशों का पालन करती है। मशीन एक खास प्रकार के अल्गोरिदम के अनुसार स्वंय ही निर्णय लेने में सक्षम हो जाती है। हांलांकि एक पूर्ण विकसित एआई अभी दूर की कौढ़ी है।

इसको एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिये आप किसी Self Deriving कार में बैठे हैं। वह कार सड़क पर दौड़ रही है। कार में मौजूद Map Navigation System उस कार को बताऐगा कि जाना कहा हैं। वहीं कार में लगे कैमरे और सेंसर सामने आने वाली चीजों को पहचानेंगें और एआई कार को मुड़ने, रूकने, हाॅर्न बजाने या ब्रेक लगाने का निर्देश देगा। यह सब टेक्नाॅलाॅजी बेस्ड है और पूर्व में ही कार में यह सब स्टोर किया जा चुका होगा।

एआई (Artificial Intelligence) के फायदे

एआई तकनीकि भविष्य की तकनीकि है। भविष्य में AI बहुत फायदेमंद होने वाला है। एआई तकनीकि से ऐसे कंप्यूटर विकसित होने वाले हैं जिससे तकनीकि में नई ऊंचाइयां हासिल होंगी। एआई तकनीकि लैस से रोबाट हमारे रोजमर्रा की जिंदगी में काम आऐंगे। स्वास्थ्य के क्षेत्र में एआई तकनीकि से मरीजों के आपरेशन बिना गलती के किये जा सकेंगे। बिना ड्राइवर की कारें सड़क पर दौडेंगी जिससे एक्सीडेंट पर रोक लगेगी। आर्टिफिशियल सैनिक सीमाओं की रक्षा करेंगे। हांलांकि अभी एआई तकनीक भी बहुत विकास होना बाकी है। लेकिन भविष्य में एआई तकनीकि मानव सभ्यता के लिये बहुत फायदेमंद होगी।

चूंकि AI एक तकनीकि जनित इंटेलीजेंस है इसलिये इससे गलतियां होने के चांस न के बराबर हैं। इसलिये कई सारे काम बिना गलतियों के किये जा सकते हैं। Manufacturing में एआई सबसे ज्यादा लाभदायक साबित होगी। वहीं इंसान दिन में सिर्फ 6-8 घंटे काम कर सकता है। इसके बाद मनुष्य को आराम चाहिये। लेकिन एआई बिना रूके ही 24 घंटे काम कर सकेगी। एआई का उपयोग उन कामों के लिये किया जा सकता है जिनमें 24 घंटे काम करने की जरूरत हो।

आज कई कंपनिया AI Chatbot के माध्यम से अपने ग्राहकों की समस्याओं का समाधान देती हैं। ये Chatbot हर समय आपकी मदद के लिये तैयार रहता है। एआई का इस्तेमाल व्यापारिक उद्देश्यों के लिये किया जा सकता है।

एआई (Artificial Intelligence) के नुकसान

एआई तकनीकि को लेकर दुनियाभर में कई बुध्दिजीवी सवाल भी उठा रहे हैं। उनका मानना हैं कि एआई तकनीकि फायदेमंद कम नुकसानदायक ज्यादा होगी। AI Technology के बाद मशीनें स्वयं निर्णय ले सकेंगी जिससे मानव सभ्यता को खतरा पैदा हो सकता है। हाल ही में AI को लेकर एक खास खबर आई थी। खबर के मुताबिक Facebook एआई पर काम कर रही थी। इसी दौरान दो मशीनें आपमें में बात करना शुरू हो गई। बात करने के लिये उन्होने एक खास कोडिंग भाषा तैयार कर ली थी।

इसका सीधा मतलब यह है भविष्य में मनुष्य और मशीनों के बीच प्रतिस्पर्धा पैदा हो सकती है। मशीनें इंसानों से नाराज भी हो सकती हैं और इंसानों को नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। हो सकता मशीनें इंसान के आदेशों का पालन ही न करें और अपने मन मुताबिक काम करना शुरू कर दें। ऐसे में मानव सभ्यता को काफी खतरे उठाने पड़ सकते हैं।

वहीं जब AI मनुष्य की जगह काम करना शुरू कर देगी तो कई सेक्टर में लोगों की नौकरियां दाव पर लगेंगी। जिससे बेरोजगारी बढ़ जाऐगी। कई वैज्ञानिकों का मानना हैं कि जब मशीन बिना इंसान के कंट्रोल के फैसला लेने लगेगी तो वह बेलगाम हो जाएगी। तक क्या होगा जब मशीन जीवन, सुरक्षा, जन्म मृत्यु, सामाजिक संबंधों से जुड़े फेसले लेने लगेगी। मशहूर वैज्ञानिक स्टीफन हाॅकिंस का कहना था कि मनुष्य हजारों वर्षों के धीमे जैविक विकासक्रम का परिणाम हैं, जो AI का मुकाबला नही कर सकता है। वहीं बिल गेट्स का मानना हैं कि यदि मनुष्य सोचने समझने वाली मशीनें निर्मित कर लेगा तो मनुष्य के अस्तित्व के लिये ही खतरा बन सकती हैं।

उम्मीद है Artificial Intelligence पर हमारा ये लेख आपको पसंद आया होगा। इस लेख को पढ़ने के बाद आप जान गये होंगें कि Artificial Intelligence क्या है? और ये कैसे काम करता है। अगर आपके मन में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को लेकर कोई और सबाल है तो आप कमेंट के माध्यम से हमसे पूंछ सकते हैं। हम आपके सबाल का जबाब जरूर देंगे। आप अपने सुझाव भी हमें कमेंट के माध्यम से दे सकते हैं।

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